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mitrta mai gaddari [full storie]

पावर फुल उल्लू बहुत बड़ा सेठिया था । उसके यहां किसी चीज की कमी नही थी । वह कंचन वन का जाना माना सेठ था । उसका दोस्त लंबू बाघ था । लंबू बाघ दिल का कपटी व सुव्वार्थी था । यह बात पावर फुल उल्लू को नही पता थी । वह लंबू बाघ को अपना सबसे अच्छा दोस्त समझता था।


लंबू बाद भी  पावर फुल उल्लू के सामने ऐसे पैस आता था। जैसे वे एक सच्चा मित्र है । पर अंदर ही अंदर वह सोचता रहता था। कब मौका मिले और मैं इस पावर फुल उल्लू की पैसो वाली तिजोरी पर हाथ साफ कर दु।


इस नियत से लंबू बाघ दोस्ती का नाटक करके पावर फुल उल्लू कके साथ रहता था । कभी कभी वह उसे bussnes के सिलसिले मैं अपने साथ लेकर चंदन वन में जाया करता था।

लंबू  बाघ ने  उसके साथ रहते रहते उसके bussnes के बारे मैं काफी  जानकारी कर ली वैसे उसने कई बार तिजोरी पर हाथ साफ करने का प्रयास किया ।किन्तु नोकरानी गिलहरी के रहने के कारण विफल हो जाता था । नोकरानी गिलहरी दिल की साफ थी वह ईमानदारी से पावर फुल उल्लू के यहां काम करती थी ।

लंबू बाघ को बार बार तिजोरी वाले घर मे चक्कर लगाते देख , गिलहरी को उस पर सक हो गया । किन्तु उसने किसी को कुछ नही बताया
था कियोंकि वह जानती थी कि बिना आंख से किसी भी चीज को पूरी तरह से देखे अपने सक को विश्ववास मैं बदल लेना मूर्खता है।
पावर फूल उल्लू की साथ रहते रहते लंबू बाघ को बहुत दिन हो गए थे। दोनो की दोस्ती की चर्चा पूरे कंचन वन में होती थी। दिनोदिन इन दोनों की दोस्ती की चर्चा बढ़ती जा रही थीं। अचानक एक दिन मौका पाकर लंबू बाघ तिजोरी वाले घर में घुस गया और  बड़ी चालाकी से इधर उधर देखता है कि कोई देख तो नही रहा ।

उसने जियो ही तिजोरी खोली और पैसा निकालने के लिए हाथ बढ़ाया त्यों ही वह गिलहरी की आवाज़ सुनकर ठिठक गया ।
किया कर रहे हो बाघ भैया गिलहरी ने पूछा । कुछ नही लंबू बाघ ने हड़बड़ाकर जवाब दिया। ये देख नोकरानी गिलहरी सब समझ गई ।उसका सक अब पूरी तरह विस्वास मैं बदल गया । कियूंकि वह लंबू बाघ को पैसो पर हाथ लगाए देख चुकी थी । सच सच बताइये ।आप किया कर रहे थे । यहाँ गिलहरी ने कड़क सुवर्ण मैं सवाल किया

कहा न कुछ नही , लंबू बाघ आंख दिखाते हुए बोला । यह सुनकर नोकरानी गिलहरी सच्चाई बताने के लिए वहां से पावर फुल उल्लू के पास जाती है।और सारी बात बताती है। पर उसकी बातों पर पावर फुल उल्लू को तनिक भी विस्वास न हुआ।
तब तक लंबू बाघ भी वहां आ जाता है।और वह उल्टा नोकरानी गिलहरी के ऊपर ही चोरी का इल्जाम लगा देता है। पावर फुल उल्लू भी उसी के ऊपर विस्वास कर लेता है । ओर नोकरानी गिलहरी को डांटने लगता हैं। नीच , कुतिया, हरामजादी , खुद चोरी करती हैं ।  औऱ इल्जाम मेरे मित्र पर देती हैं। आज के बाद ऐसा किया तो मारकर बाहर निकाल दूंगा।नोकरानी गिलहरी ये सब कुछ देख सपकपा गई ।

वह तो आई थी चोर को पकड़वाने और वह खुद ही चोर बन गई।
पावर फुल उल्लू के ऊपर भी मित्रता का भूत सवार था। लंबू बाघ मन ही मन में खुस था अब उसका चोरी करने का हौसला बुलंद हो गया था। अपने ईस बुरे काम में सफल हो जाऊँगा।


आखिरी उसे  एक दिन मौका मिल गया। और तिजोरी में से सारा पैसा निकालकर बैग में भरने लगा । इधर दुध वाला अपने पैसे लेने के लिए आता है । पावर फूल उल्लू तिजोरी मैं से पैसे निकालने के लिए आता है । परंतु खटपट की आवाज सुनकर वह चोक जाता हैं।यह क्या हो रहा है। फिर वह देखता है कि लंबू बाघ तिजोरी में से पैसे निकाल रहा है।ये देख पावर फुल उल्लू अपनी पिस्तौल निकाल कर लाता है। और लंबू बाघ के सामने खड़ा हो जाता है ।ओर बोलता है मुझे तुझसे ये उम्मीद नहीं थीं। लंबू बाघ ये देख चोक जाता हैं और बैग छोड़ कर भाग जाता है । फिर क्या पावर फुल उल्लू बाहर निकल आता है ओर नोकरानी गिलहरी के सामने सर्मिदा हो जाता हैं ।

और कहता है कि मैंने बिना जाने तुम्हें क्या क्या कह दिया।
नोकरानी गिलहरि कहती है मालिक मुझे तो उसका पहले से ही पता था कि वो सही नही है

कैसी लगी हमारी कहानी आपको हमे कमेंट मैं जरूर बता ना।


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