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Acchai aur burai [full storey]

एक शहर में दो भाई रहते थे। एक का  नाम हामिद था और दूसरे का आरिफ था । हामिद के चार लडके थे । जो अच्छे नही थे। और आरिफ के एक लड़का था । जो बहुत ईमानदार और नेक था । उन दोनों भाइयों की एक फैक्टरी थी । जो बहुत अच्छी चल रही थीं। अचानक आरिफ बेमार पड़ जाता है। और बीमारी ऐसी लगती है  की जाने का नाम नही लेती है फिर वो फैक्टरी भी नही जाते और उनका लड़का भी उनकी देखभाल मैं लगा रहता है।  । तो हामिद के चारो लड़के आते है और उनसे कहते है । की फैक्टरी में नुकसान आ गया है । अब क्या करना है। उनकी तबीयत के बारे मे कुछ नहीं पूछा । उन चारों के पापा हामिद  बाहर चले जाते है । जब वो चारो उनके पास होते है। और आरिफ का लड़का भी वही उनके पास बैठा हुआ होता है । तभी आरिफ मर जाते है । कुछ दिन बाद चारो आरिफ के लड़के के  पास आते  है।  और बोलते हैं कि फैक्टरी में बहुत नुकसान आ गया है ।तुम्हारे बाप के सिर कर्ज भी था और कर्जा भी बहुत हो गया है। परंतु या तो तुम अपनी तरफ लगा लो फैक्टरी वरना हमको दे दो । तो आरिफ का लड़का कहता कि मैं कहा से दूंगा इतना पैसा परंतु तुम्ही रख लो मुझे कुछ नही चाइये । वो चारो बहुत खुश हुए ।








और चारो ने उससे स्टाम्प पर  साइन करवा लिए की फैक्टरी अब हमारी है । लेकिन आरिफ के लड़के को कुछ गम नही था । उसने सोचा कि फैक्टरी तो अब चली गयी अब मैं क्या करूँ । 
एक दिन वो चारो उसके घर पर आये और कहने लगे कि अपना घर हमारे नाम कर दो वर्ना हम तुमको मारेंगे । उसने कहा नही भाई मारना नही में ये घर खुद ही छोड़ देता हूँ। और ये कहकर वो घर से निकल गया , वो दूसरे शहर में पहुचा फिर उसने वहां आराम किया । 



वो बेचारा किसी काम की तलाश में था । परंतु उसे एक कारखाने के दफ्तर मैं कैशियर की नोकरी मिल गई । को बहुत खुश था चलो काम तो मिला । एक रात उस कारखाने के मालिक के बेटे ने दफ्तर की चाबी उठाकर दफ्तर खोल दिया और गल्ले मैं से सो रुपये निकाल लिए । और सोचा कि नाम तो उस कैशियर का आयेगा। के कह कर उसने दफ्तर वैसे ही बंद कर दिया । अब सुबह हुई । मालिक हिसाब लेने के लिए आया । तो रोकड़ मैं वो ही सो रुपये कम हुए । जो उसने चुराये थे। मालिक बोला ये किया सो रुपये कम कैसे हुए । वो बोला मालिक मुझे नहीं पता ये कैसे हुआ मैने तो कल बिल्कुल सही हिसाब लगाकर रखा था । ये पता नही कैसे हुआ । मालिक जोर से बोलता है हू और कहते हो ये कैसे हुआ । तुम ने ही चुराये है वो पैसे । अब मैं तुम्हें नोकरी पर नही रखूंगा निकल जाओ यहां से । ये कह कर उसे निकाल दिया जाता है । अब वो रास्ते में जा रहा था कि अचानक उसे राह मैं सो रुपये मिल जाते है । 

वो उन रुपए को उठा लेता है । और उस कारखाने में आता है और उस मालिक को देता है । और कहता है कि आपका कर्ज़दार हु लो अपने सो रुपये जो मैंने चुराये थे । ये देखकर कर कारखाने का मालिक उसको अपने गले लगा लेता है । और बोलता है आज से मेरे एक बेटा नही बल्कि दो बेटे है । और वो सो रुपये मैने ही अपने लड़के से कहकर चुरवाये थे । अब वो उसका लड़का बन जाता हैं । और बहुत पैसा भी हों जाता है । 

अब वहां का  हाल जहाँ वे चार भाई थे । तो आरिफ के लड़के पर एक दिन लेटर आता है कि उन चारों ने सब कुछ इधर उधर कर दिया है । और यहाँ से जाने कहा चले गए । अब ये फैक्टरी आपके नाम पर आ गई है । आप यहाँ आके सब कुछ देख लो । 


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