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Aise badhay apni yaadast [full tutorial]

ऐसे बढ़ाए अपनी याददसत...

किसी ने सही कहा है. कि याददशत की वजह से ही हमारी जिंदगी अरथवान बनती है अगर याददसत न होती तो हर सुबह हम अपने लिए ही अजनबी होते. आईना भी हमारी पहचान न करा पाता. अमेरिका के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक विलियम जेम्स कहते हैं कि दिमाग के सही इस्तेमाल के लिए जरूरी चीजों को याद रखना भी एक कला है. यदि हम हर चीज़ को याद रखने की कोशिश करेंगे तो हमारा दिमाग परेशान हो जाएगा. ओर सही वक्त पर एक चीज़ भी याद नहीं आएगी!  हमें चाहिए कि हम केवल जरूरी चीजों को ही याद रखें?  इंसानी दिमाग में सीखने ओर याद रखने की कमाल की काबिलियत हैं हमें इस काबिलियत का बेहतरीन ढंग से इस्तेमाल करना आना चाहिए.!



इस्तेमाल से ओर बढ़ेगा दिमाग..

हमारे दिमाग का औसत वजन करीब 1.4 किलोग्राम होता है! छोटे से दिमाग में करीब 100 अरब तंञिका कोशिकाए होती है तंञिकाओ के फैले जाल में दुनियाभर की जानकारियाँ इकट्ठा करने तथा उसे सुरक्षित रखने की ळमता होती हैं ! कहा जाता है कि सामान्यतः हम अपने मसतिक की ळमता का 8 से 10 फीसदी भाग ही इस्तेमाल करते हैं. यादगार को चुस्त _ दुरुस्त बनाने के लिए मसतिक की ळमता का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए! कुछ ऐसा करते रहना चाहिए. जिसमें दिमाग का उपयोग हो......




अच्छी नींद से बढ़ाए ळमता..

अच्छी नींद का असर दिमाग की कार्य शैली पर पड़ता है अगर रात में अच्छी नींद न आए. तो सुबह दिमाग की कार्य शैली में जबरदस्त फर्क पड़ता है. जो याददसत ओर सीखने के लिए जरूरी है यूनिवर्सिटी ऑफ जेनेवा के एक शोध से भी इस बात का खुलासा हुआ है कि अच्छी नींद से दिमाग सीखे गए अनुभवों को ओर मजबूत करके इकट्ठा कर लेता है उनके शोध में यह निषकृष भी निकले कि हम दिन में चीजें सीखते हैं .ओर रात में उसे करीने से सजाकर याद करते हैं.!








ऩए नए हुनर की तालीम..

हम अपने दिमाग को नए नए हुनर की तालीम देकर अपनी यादगार बढा सकते हैं. अधयन बताते हैं कि हमारी याददासत हमारी मांसपेशियों की तरह होती है. हम जितना ज्यादा इनका इस्तेमाल करेगे वे उतनी ही मजबूत होगी . फिर चाहे हम कितने ही बूढ़े कयो न हो जाए . वैज्ञानिक शोधो से इस बात की पुष्टि होती है . की बचपन में सीखी गई भाषाएँ वृद्धा वसथा में वयकति के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होती हैं

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